Nuclear Fission और Nuclear Fusion क्या है ?

Nuclear Fission और Nuclear Fusion, दोनों परमाणु के Nucleus को विभाजित (Divided) करके या Nucleus को मिला करके ऊर्जा पैदा करने की प्रक्रिया है ।

Table of Contents

आइए Fission और Fusion को जाने और साथ ही इसके भविष्य के challenges और टेक्नॉलजी development को समझे । सबसे पहले चंद शब्दों मे दोनों प्रक्रियों को जाने :-

नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission):

  • यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक भारी Nucleus (जैसे यूरेनियम-235) दो या दो से अधिक छोटे नाभिकों में विभाजित हो जाता है।
  • इस प्रक्रिया में ऊर्जा निकलती है, जो प्रकाश और ऊष्मा (Heat) के रूप में होती है।
  • नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) का उपयोग परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (Nuclear Power Plant) में बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है।
  • यह परमाणु बमों में भी इस्तेमाल होता है।

नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion):

  • यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक हल्के Nucleus एक साथ मिलकर एक भारी Nucleus बनाते हैं।
  • इस प्रक्रिया में भी ऊर्जा निकलती है, जो Fission से भी अधिक होती है।
  • नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का स्रोत है।
  • वैज्ञानिक अभी भी इस प्रक्रिया का उपयोग करके बिजली उत्पादन के लिए व्यावहारिक तरीके विकसित करने पर काम कर रहे हैं।

आइए अब Nuclear Fission और Fusion दोनों प्रक्रियों को विस्तार से जाने :-

नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) क्या है?

नाभिकीय विखंडन भारी परमाणु के Nucleus के विभाजन की प्रक्रिया है, आमतौर पर एक न्यूट्रॉन के अवशोषण के बाद, यह विभाजन दो या दो से अधिक छोटे Nucleus, कुछ अतिरिक्त न्यूट्रॉन और एक विशाल मात्रा में ऊर्जा निकलने का कारण बनता है।

नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) क्या है?

Formula का उदाहरण:

एक उदाहरण के रूप में, यूरेनियम-235 (²³⁵U) के Fission को लें। यह निम्न समीकरण द्वारा दर्शाया जा सकता है:

²³⁵U + ¹n → ¹⁴¹Ba + ³⁶Kr + 3(¹n) + ऊर्जा (energy)
  • ²³⁵U: यूरेनियम-235 का समस्थानिक (isotope)
  • ¹n: न्यूट्रॉन
  • ¹⁴¹Ba: बैरियम-141 का विखंडन उत्पाद (fission product)
  • ³⁶Kr: क्रिप्टॉन-36 का विखंडन उत्पाद (fission product)
  • 3(¹n): तीन अतिरिक्त न्यूट्रॉन निकले

यह समीकरण दर्शाता है कि यूरेनियम-235 का एक नाभिक एक न्यूट्रॉन को अवशोषित करने के बाद, बैरियम-141 और क्रिप्टॉन-36 के दो छोटे नाभिकों में विभाजित हो जाता हैं। साथ ही, तीन नए न्यूट्रॉन निकलते हैं और प्रक्रिया में ऊर्जा भी निकलती है।

ऊर्जा का स्रोत:

निकली हुई ऊर्जा द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता (mass-energy equivalence) के सिद्धांत पर आधारित है, जिसे अल्बर्ट आइंस्टीन के प्रसिद्ध समीकरण E = mc² द्वारा दर्शाया जाता है। इसमें, E निकली हुई ऊर्जा है, m द्रव्यमान में कमी है और c प्रकाश की गति है।

नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)

विखंडन के दौरान, कुल द्रव्यमान (Fission Product और न्यूट्रॉन का combined mass) प्रारंभिक यूरेनियम-235 Nucleus और न्यूट्रॉन के द्रव्यमान से थोड़ा कम होता है। यह द्रव्यमान difference, विशाल मात्रा में ऊर्जा के रूप में परिवर्तित हो जाता है।

श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction):

नाभिकीय विखंडन की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह एक श्रृंखला अभिक्रिया (Chain Reaction) को जन्म दे सकता है। fission के दौरान निकले हुए अतिरिक्त न्यूट्रॉन आसपास के अन्य भारी परमाणुओं को विखंडित (Divided) कर सकते हैं, जिससे और भी अधिक न्यूट्रॉन निकल सकते हैं। यह एक निरंतर प्रक्रिया बन सकती है जो बहुत अधिक ऊर्जा पैदा करती है।

हालांकि, Chain Reaction को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है ताकि निकली हुई ऊर्जा को सुरक्षित और कुशलता से इस्तेमाल किया जा सके। परमाणु Power Plants में नियंत्रण छड़ों (control rods) का उपयोग करके Chain Reaction को Regulate किया जाता है।

Nuclear Fusion Chain Reaction

अनुप्रयोग:

नाभिकीय विखंडन का उपयोग Nuclear Power Plant में बिजली उत्पादन के लिए किया जाता है। साथ ही, इसका उपयोग विस्फोटक उपकरणों जैसे परमाणु बम बनाने में भी किया जाता है।

आगे की बातें:

  • विभिन्न प्रकार के विखंडन: ऊपर दिए गए उदाहरण में Binary विखंडन (दो नाभिकों में विभाजन) को दिखाया गया है, वहीं Trinary विखंडन (तीन नाभिकों में विभाजन) भी कम आम तौर पर हो सकता है।
  • न्यूट्रॉन और श्रृंखला अभिक्रिया नियंत्रण (Control chain Reaction): जैसा कि बताया गया है, श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करना महत्वपूर्ण है। moderator (मॉडरेटर) जैसे पानी न्यूट्रॉन को धीमा कर सकते हैं, जिससे उनके द्वारा आगे विखंडन होने की संभावना कम हो जाती है और परमाणु रिएक्टर में अधिक स्थिर Reaction दर प्राप्त होती है।
  • सुरक्षा संबंधी चिंताएं: अनियंत्रित श्रृंखला अभिक्रिया (Uncontrol Chain Reaction) और रेडियोधर्मी पदार्थों (Radioactive Substances) के निकलने की संभावना के कारण Nuclear Fission Reactions सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा करती हैं। इसमे Reactor डिजाइन में आपातकालीन शटडाउन सिस्टम और संरक्षण ढांचे जैसे सुरक्षा उपाय शामिल होते हैं।
  • अपशिष्ट उत्पाद: नाभिकीय विखंडन Radioactive Waste उत्पाद बनाता है, जिन्हें उनके Decay समय के कारण सावधानीपूर्वक Management और Long Term Storage की आवश्यकता होती है।
Nuclear Fission Power Plant

अन्य क्षेत्रों में अनुप्रयोग:

  • चिकित्सा Isotopes: Fission Product में से कुछ के चिकित्सा अनुप्रयोग हैं। उदाहरण के लिए, Technetium-99m का उपयोग Diagnosis Imaging Procedure में किया जाता है।
  • परमाणु हथियार: परमाणु विखंडन परमाणु बमों के पीछे का सिद्धांत है, जो विनाशकारी मात्रा में ऊर्जा छोड़ने के लिए एक अनियंत्रित Chain Reaction का उपयोग करते हैं।

अतिरिक्त विचार:

  • परमाणु ऊर्जा का भविष्य: भविष्य के ऊर्जा उत्पादन में नाभिकीय विखंडन की भूमिका बहस का विषय बनी हुई है। यद्यपि यह एक कम कार्बन ऊर्जा स्रोत प्रदान करता है, फिर भी सुरक्षा और अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी चिंताएं बनी रहती हैं।

आइए नाभिकीय विखंडन के कुछ जटिल पहलुओं पर नजर डालें:

न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रम (Neutron Spectrum):

  • नाभिकीय विखंडन के दौरान निकलने वाले न्यूट्रॉन विभिन्न ऊर्जाओं के साथ उत्सर्जित होते हैं। इस ऊर्जा वितरण को न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रम कहते हैं।
  • अधिकांश न्यूट्रॉन तीव्र गति (और इसलिए उच्च ऊर्जा) वाले होते हैं। ये तीव्र गति वाले न्यूट्रॉन जरूरी नहीं कि आसानी से विखंडन का कारण बन सकें।
  • विखंडन को बनाए रखने के लिए moderator (मॉडरेटर) का उपयोग किया जाता है। यह मॉडरेटर न्यूट्रॉन को धीमा कर देता है, जिससे उनके द्वारा नाभिकीय विखंडन का कारण बनने की संभावना बढ़ जाती है।

क्रिटिकल मास (Critical Mass):

  • श्रृंखला अभिक्रिया को बनाए रखने के लिए न्यूट्रॉन की संख्या महत्वपूर्ण है।
  • किसी दिये गयी विखंडनशील सामग्री की न्यूनतम मात्रा जिसे एक श्रृंखला अभिक्रिया को बनाए रखने के लिए आवश्यक होता है, उसे क्रिटिकल मास ( महत्वपूर्ण द्रव्यमान) कहते हैं।
  • क्रिटिकल मास से कम मात्रा में विखंडनशील सामग्री में श्रृंखला अभिक्रिया नहीं हो सकती क्योंकि बहुत सारे न्यूट्रॉन सामग्री से बाहर निकल जाएंगे।
  • परमाणु रिएक्टरों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वे क्रिटिकल मास से नीचे रहें। नियंत्रण छड़ों (control rods) का उपयोग करके श्रृंखला अभिक्रिया को और नियंत्रित किया जाता है, जो न्यूट्रॉन अवशोषण को बढ़ाकर प्रतिक्रिया दर को धीमा कर देती हैं।

विखंडन उत्पाद (Fission Products):

  • नाभिकीय विखंडन के दौरान विभिन्न नाभिकीय उत्पाद बनते हैं, जिन्हें विखंडन उत्पाद कहते हैं। ये उत्पाद आम तौर पर Fissionable Nucleus से हल्के होते हैं और अस्थिर Radioactive Isotopes होते हैं।
  • ये Radioactive Isotopes समय के साथ क्षय हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि वे Radioactive Radiation Emitted करते हुए अधिक स्थिर नाभिकों में बदल जाते हैं।
  • विभिन्न विखंडन उत्पादों के क्षय समय अलग-अलग होते हैं, कुछ सेकंड से लेकर लाखों वर्षों तक।
  • Radioactive Waste Management नाभिकीय ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसमें उपयोग किए गए ईंधन को सुरक्षित रूप से संग्रहित करना और उनका निपटारा करना शामिल है।

नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) क्या है ?

नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें दो या दो से अधिक परमाणुओं के केंद्र (nuclei) आपस में मिलकर एक नया, भारी नाभिक बनाते हैं। इस प्रक्रिया में थोड़ा द्रव्यमान कम हो जाता है, और वही द्रव्यमान बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा के रूप में निकलता है। यह वही प्रक्रिया है जिससे सूर्य और दूसरे तारे अपनी ऊर्जा प्राप्त करते हैं।

आसान शब्दों में, नाभिकीय संलयन सूर्य के प्रकाश का रहस्य है! सूर्य के अंदर हाइड्रोजन जैसे हल्के परमाणुओं का संलयन होकर हीलियम बनता है और इस दौरान बहुत बड़ी मात्रा में ऊर्जा निकलती है।

नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)

वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को पृथ्वी पर दोहराने की कोशिश कर रहे हैं ताकि हम इससे बहुत साफ और सुरक्षित तरीके से ऊर्जा प्राप्त कर सकें । लेकिन फिलहाल, इसे नियंत्रित रूप से करने में काफी दिक्कतें हैं क्योंकि इसके लिए सूर्य के केंद्र के समान बहुत अधिक तापमान और दाब की ज़रूरत होती है।

नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) थोड़ा विस्तार से जाने :-

संलयन प्रक्रिया का विज्ञान: Science Behind Nuclear Fusion

नाभिकीय संलयन के पीछे का विज्ञान मूल रूप से चार मूलभूत बलों में से एक, अनुक्रिय बल (Strong Nuclear Force) पर आधारित है। यह बल नाभिक के अंदर प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को एक साथ जोड़े रखता है. संलयन में, हल्के परमाणुओं के नाभिकों को इतना करीब लाया जाता है कि अनुक्रिय बल उन्हें एक साथ “चिपका” देता है, जिससे एक भारी नाभिक बनता है.

ऊर्जा निकलने का सूत्र (Energy Formula):

Einstein के प्रसिद्ध समीकरण E = mc² का उपयोग करके हम संलयन से निकलने वाली ऊर्जा की मात्रा की गणना कर सकते हैं. जहाँ:

  • E – निकली हुई ऊर्जा (Energy)
  • m – खोया हुआ द्रव्यमान (Mass)
  • c – प्रकाश की गति (Speed of Light)

यह समीकरण बताता है कि थोड़ी मात्रा में द्रव्यमान के नुकसान से भी बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा निकल सकती है, क्योंकि प्रकाश की गति (c) का मान बहुत अधिक होता है.

कुलोम्ब प्रतिकर्षण (Coulomb Barrier):

हालांकि Reaction Force नाभिकों को जोड़ने में मदद करता है, परमाणु के Nucleus में प्रोटॉन Positively Charge लिए होते हैं। समान Charge एक दूसरे को दूर धकेलते हैं (इसे कुलोम्ब प्रतिकर्षण (Coulomb repulsion) कहते हैं)। Fusion होने के लिए, हमें नाभिकों को इस Repulsion को पार करने के लिए इतना ऊर्जाशील बनाना होता है कि वे एक-दूसरे के इतने करीब आ सकें कि Reaction Force उन्हें जोड़ सके।

तापमान और दाब की भूमिका: Role of Heat and Pressure

नाभिकों को पर्याप्त ऊर्जा देने के लिए, हमें उन्हें बहुत अधिक तापमान (करोड़ों डिग्री सेल्सियस) तक गर्म करना पड़ता है। इससे परमाणु अपने इलेक्ट्रॉनों को खो देते हैं और प्लाज्मा अवस्था में चले जाते हैं। साथ ही, संलयन प्रतिक्रिया को बनाए रखने के लिए पर्याप्त दाब की आवश्यकता होती है।

उपयोगी प्रमेय (Theorems):

  • आइडियल गैस नियम (Ideal Gas Law): प्लाज्मा को अक्सर एक आदर्श गैस के रूप में माना जाता है, इसलिए इस प्रमेय का उपयोग प्लाज्मा के तापमान, दाब और घनत्व के बीच संबंध को समझने के लिए किया जाता है।
  • मैक्सवेल-बोल्ट्जमैन वितरण (Maxwell-Boltzmann distribution): यह प्रमेय प्लाज्मा में कणों की गति और ऊर्जा के वितरण को निर्धारित करता है। Fusion के लिए पर्याप्त संख्या में कणों को पर्याप्त रूप से उच्च गति प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।

चुनौतियाँ और भविष्य:

नाभिकीय संलयन को नियंत्रित रूप से बनाए रखना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। वैज्ञानिक लगातार नए तरीके खोज रहे हैं ताकि तापमान और दाब को बनाए रखा जा सके और साथ ही संलयन प्रतिक्रिया से प्राप्त ऊर्जा उस ऊर्जा से अधिक हो जिसे इसे बनाए रखने में लगाया जाता है।

हालांकि चुनौतियां हैं, पर नाभिकीय संलयन भविष्य का एक स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा स्रोत बनने की काफी संभावना रखता है। इस क्षेत्र में निरंतर शोध हो रहा है और उम्मीद है कि आने वाले दशकों में यह तकनीक व्यावहारिक रूप ले लेगी।

आइए नाभिकीय संलयन के बारे में और भी जाने:

अग्रिम पाठ्यक्रम (Advanced Studies):

  • प्लाज्मा भौतिकी (Plasma Physics): संलयन अनुसंधान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र प्लाज्मा भौतिकी है। यह उस पदार्थ की अवस्था का अध्ययन है जिसमे नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) होता है (प्लाज्मा)। प्लाज्मा भौतिकी के सिद्धांतों को समझने से वैज्ञानिकों को यह पता चलता है कि प्लाज्मा को कैसे नियंत्रित और बनाए रखा जाए।
  • टोकामक (Tokamak) और स्टेलरेटर (Stellarator): ये दोनों ही संलयन रिएक्टरों के डिजाइन हैं जिनका उपयोग वैज्ञानिक संलयन अनुसंधान [Fusion Research] में कर रहे हैं। टोकामक एक Toroidal (आवृत्त वलय [Circumscribed Ring]) आकार का Reactor है जिसमें शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग प्लाज्मा को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। स्टेलरेटर एक और डिजाइन है जो एक अधिक जटिल चुंबकीय क्षेत्र का उपयोग करता है।

अनुसंधान संस्थान (Research Institutes):

  • अंतर्राष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रिएक्टर (ITER – International Thermonuclear Experimental Reactor): फ्रांस में स्थित ITER दुनिया का सबसे बड़ (zhèng zài niàn zhù – under construction) संलयन Reactor है। इसका उद्देश्य प्रदर्शित करना है कि संलयन ऊर्जा को Practical रूप से कैसे प्राप्त किया जा सकता है।

भारत और दुनिया मे Nuclear Fusion की अद्यतन जानकारी (Latest Updates):

  • आप भारत में नाभिकीय संलयन अनुसंधान के बारे में जानने के लिए भारतीय आणविक ऊर्जा संस्थान (Institute for Plasma Research) की वेबसाइट देख सकते हैं [Institute for Plasma Research India].
  • दुनिया भर में हो रहे नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) शोध की ताजा खबरों के लिए आप फ्यूजन पावर एसोसिएशन (Fusion Power Association) की वेबसाइट देख सकते हैं [Fusion Power Association website].

नाभिकीय संलयन के भविष्य और इसके संभावित प्रभावों पर बातचीत करते हैं:

संभावित लाभ: Advantage

  • स्वच्छ ऊर्जा स्रोत: नाभिकीय संलयन एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत है क्योंकि यह प्रक्रिया रेडियोधर्मी कचरा (Radioactive Waste) उत्पन्न नहीं करती है, जीवाश्म ईंधन के जलने से होने वाले प्रदूषण की तुलना में यह पर्यावरण के लिए बहुत कम हानिकारक है।
  • अक्षय ऊर्जा स्रोत (Renewable Nuclear Energy): संलयन के लिए ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का उपयोग किया जाता है, जो समुद्र के पानी से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। यह एक Renewable ऊर्जा स्रोत है, जिसका मतलब है कि यह समाप्त होने वाला नहीं है।
  • अधिक ऊर्जा उत्पादन: एक छोटी मात्रा में संलयन ईंधन से बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा पैदा की जा सकती है। इससे यह पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की तुलना में अधिक ऊर्जा-कुशल (Energy Efficient) बन सकता है।

चुनौतियाँ दूर करना: Challenges

  • नियंत्रित संलयन (Control Fusion): फिलहाल, वैज्ञानिकों को अभी भी नाभिकीय संलयन को नियंत्रित और व्यवहारिक रूप से बनाए रखने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • उच्च तापमान और दाब बनाए रखना: संलयन प्रतिक्रिया को बनाए रखने के लिए सूर्य के केंद्र के समान अत्यधिक उच्च तापमान और दाब की आवश्यकता होती है, वैज्ञानिकों को ऐसे तरीके खोजने होंगे जिनसे पृथ्वी पर कृत्रिम रूप से दीर्घकाल तक इतने उच्च तापमान और दाब को बनाए रखा जा सके।

भविष्य के प्रभाव: Future Effect

  • ऊर्जा स्वतंत्रता: व्यावहारिक संलयन तकनीक से देशों को जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है, जिससे वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में बदलाव आ सकते हैं।
  • नई तकनीकों का विकास: संलयन अनुसंधान से विकसित तकनीकें अन्य क्षेत्रों को भी लाभ पहुंचा सकती हैं, उदाहरण के लिए उन्नत सामग्री विज्ञान (Advanced Material Science) और चिकित्सा में प्रगति।
  • ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security): संलयन ऊर्जा एक विश्वसनीय और स्वदेशी ऊर्जा स्रोत हो सकती है, जो देशों को ऊर्जा सुरक्षा प्रदान कर सकती है।

हालांकि नाभिकीय संलयन को व्यावहारिक रूप से लागू करने में अभी भी कई साल लग सकते हैं, इस क्षेत्र में निरंतर प्रगति हो रही है, यह माना जाता है कि भविष्य में नाभिकीय संलयन एक स्वच्छ, सुरक्षित और अक्षय ऊर्जा स्रोत के रूप में वैश्विक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) और नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) मे क्या अंतर है ?

नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) और नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) दोनों ही परमाणुओं के केंद्र (nuclei) से जुड़ी प्रक्रियाएं हैं लेकिन ये एक दूसरे से काफी भिन्न हैं. आइए इन दोनों में मुख्य अंतरों को देखें:

Nuclear Fusion vs Nuclear Fission

प्रक्रिया:

  • संलयन (Fusion): दो हल्के परमाणुओं के नाभिकों को मिलाकर एक भारी नाभिक बनाना।
  • विखंडन (Fission): एक भारी नाभिक को दो या दो से अधिक छोटे नाभिकों में तोड़ना।

ईंधन:

  • संलयन: हाइड्रोजन के समस्थानिक (isotopes) ड्यूटेरियम और ट्रिटियम, ये हल्के और पृथ्वी पर प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
  • विखंडन: यूरेनियम-235 या प्लूटोनियम-239 जैसे भारी अस्थिर नाभिक, ये रेडियोधर्मी होते हैं और प्रकृति में कम मात्रा में पाए जाते हैं।

निकलने वाला पदार्थ:

  • संलयन: मुख्य रूप से ऊर्जा और थोड़ी मात्रा में हीलियम गैस, यह एक स्वच्छ प्रक्रिया मानी जाती है।
  • विखंडन: ऊर्जा के साथ-साथ रेडियोधर्मी कचरे के रूप में भारी मात्रा में न्यूट्रॉन और छोटे नाभिक निकलते हैं। रेडियोधर्मी कचरे का निपटारा एक बड़ी चुनौती है।

नियंत्रण:

  • संलयन: अभी भी वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती है. इसके लिए बहुत अधिक तापमान और दाब की आवश्यकता होती है।
  • विखंडन: परमाणु रिएक्टरों में नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन दुर्घटनाओं की स्थिति में खतरनाक हो सकता है। चरनोबिल nuclear power plant Disaster इसका एक अच्छा उद्धरण है ।

ऊर्जा उत्पादन:

  • संलयन: एक छोटी मात्रा में ईंधन से बहुत अधिक ऊर्जा पैदा करने की क्षमता रखता है, लेकिन इसे अभी तक व्यावहारिक रूप से लागू नहीं किया गया है।
  • विखंडन: वर्तमान में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

भविष्य:

  • संलयन: वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा का एक संभावित स्रोत हो सकता है।
  • विखंडन: रेडियोधर्मी कचरे के कारण एक स्थायी समाधान नहीं माना जाता है।

संक्षेप में, नाभिकीय संलयन हल्के परमाणुओं को मिलाकर स्वच्छ ऊर्जा प्राप्त करने की एक होनहार प्रक्रिया है, जबकि नाभिकीय विखंडन भारी परमाणुओं को तोड़कर ऊर्जा पैदा करता है लेकिन रेडियोधर्मी कचरा उत्पन्न करता है। फिलहाल विखंडन का उपयोग किया जाता है, लेकिन भविष्य में संलयन एक बेहतर विकल्प बन सकता है।

उम्मीद है दोस्तों Nuclear Fission और Nuclear Fusion क्या है ? आपको यह समझ आया होगा , अगर हमसे कुछ point miss हो गए है तो आप नीचे कमेन्ट करके बता सकते है ओर साथ ही इसको शेयर भी करे । धन्यवाद !

जय हिन्द !

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